Strait of Hormuz: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक माने जाने वाले इस रास्ते से करीब 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई होती है। मौजूदा हालात में यह मार्ग लगभग ठप जैसा हो गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता और अस्थिरता बढ़ गई है।
बड़े देशों की बढ़ी सक्रियता
इस संकट के बीच United Kingdom, France, Germany, Italy, Netherlands और Japan जैसे देशों ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। इन देशों ने कहा है कि वे हालात सामान्य करने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार हैं। हालांकि, इन देशों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कोई त्वरित सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी और पहले कूटनीतिक स्तर पर समाधान तलाशा जाएगा।
ईरान पर आरोप, हालात गंभीर
रिपोर्ट्स के मुताबिक Iran पर जहाजों पर हमले और मार्ग बाधित करने के आरोप लगे हैं। अब तक 23 जहाजों से जुड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें 10 तेल टैंकर भी शामिल हैं। इससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
अमेरिका की अपील
इस बीच Donald Trump ने अन्य देशों से इस समुद्री रास्ते को खोलने में सहयोग की अपील की है। हालांकि अभी तक कोई भी देश सीधे सैन्य हस्तक्षेप के लिए तैयार नहीं दिख रहा है। सभी देश बातचीत और रणनीति पर जोर दे रहे हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। जानकारी के अनुसार करीब 20,000 नाविक और हजारों जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका व्यापक असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल, वैश्विक समुदाय की नजर इस संकट के अगले कदम पर टिकी हुई है।
