नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़े अध्याय को लेकर माफी मांग ली है। हालांकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि विवादित अध्याय से जुड़े तीनों लेखकों मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार की सेवाएं फिलहाल न ली जाएं।
प्रोफेसर मिशेल डैनिनो
मिशेल डैनिनो का जन्म वर्ष 1956 में फ्रांस में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से मोरक्को से था। वे 21 वर्ष की आयु में भारत आए और तब से यहीं रह रहे हैं। वे तमिलनाडु के ऑरोविल में भी रहे हैं। डैनिनो भारतीय सभ्यता और प्राचीन इतिहास के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर में अतिथि प्राध्यापक रहे हैं और पुरातात्विक विज्ञान केंद्र की स्थापना में सहयोग कर चुके हैं वे भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। उन्हें वर्ष 2017 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वर्तमान में वे NCERT की सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष हैं।
सुपर्णा दिवाकर
सुपर्णा दिवाकर को ग्रामीण विकास, नेतृत्व और शिक्षा नीति के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक प्रमुख गैर-सरकारी संगठन के साथ की थी वे भारतीय विकास प्रबंधन स्कूल की सह-संस्थापक हैं और कर्नाटक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की कार्यबल में भी शामिल रही हैं। वे एनसीईआरटी की राष्ट्रीय पाठ्यक्रम एवं शिक्षण-अधिगम सामग्री समिति की मुख्य सलाहकार भी रह चुकी हैं और कई शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के निर्माण में योगदान दे चुकी हैं।
आलोक प्रसन्ना कुमार
आलोक प्रसन्ना कुमार पेशे से अधिवक्ता और नीति विशेषज्ञ हैं। उन्होंने नालसर विधि विश्वविद्यालय से विधि की पढ़ाई की और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से सिविल लॉ में उच्च अध्ययन किया है। वे विधि केंद्र कानूनी नीति के सह-संस्थापक और वरिष्ठ शोध फेलो रहे हैं। वर्तमान में वे सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में वकालत करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुनवाई के दौरान NCERT ने बताया कि उसने विवादित अध्याय का संशोधित संस्करण तैयार कर लिया है। इस पर पीठ ने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि संशोधित अध्याय को तब तक प्रकाशित न किया जाए, जब तक संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की समिति उसकी समीक्षा न कर ले। कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक नई समिति गठित करने का निर्देश दिया है, जिसमें एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल होंगे।
क्या है पूरा विवाद
NCERT की कक्षा 8 की नई पाठ्यपुस्तक में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक अध्याय के अंतर्गत ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ नाम से एक खंड जोड़ा गया था। इस खंड में न्यायिक व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों जैसे न्यायाधीशों की कमी, जटिल कानूनी प्रक्रियाएं, आधारभूत ढांचे की कमजोरी और मामलों के भारी लंबित होने जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया था। इसी सामग्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था और अब मामले की सुनवाई जारी है।
