Census 2027: भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना का पहला चरण आज, 1 अप्रैल से शुरू हो गया है, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस चरण में हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना के तहत देशभर में मकानों की गिनती की जाएगी। यह जनगणना मूल रूप से 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था। अब इसे दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल जनगणना के रूप में आयोजित किया जा रहा है।
जनगणना दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में घरों की सूची और आवास संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना की जाएगी। इस बार आजादी के बाद पहली बार जाति संबंधी जानकारी भी एकत्र की जाएगी। साथ ही, हर घर की लोकेशन डिजिटल मैप पर दर्ज की जाएगी, जिससे भविष्य की योजनाओं और आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी।
इस महाअभियान में करीब 30 लाख कर्मचारी हिस्सा लेंगे। जानकारी जुटाने के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा और निगरानी के लिए सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS) लागू किया गया है। इसके अलावा, अधिकारी HLB क्रिएटर वेब मैप एप्लिकेशन का इस्तेमाल करेंगे।
जनगणना का कार्यक्रम राज्यों के अनुसार अलग-अलग तारीखों में निर्धारित किया गया है। महाराष्ट्र, राजस्थान और झारखंड में यह 16 मई से 14 जून के बीच होगी, जबकि उत्तर प्रदेश में 22 मई से 20 जून तक प्रक्रिया चलेगी। अन्य राज्यों में भी अप्रैल से सितंबर के बीच चरणबद्ध तरीके से जनगणना पूरी की जाएगी।
इस बार नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प भी दिया गया है। लोग वेब पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। यह सुविधा 16 भाषाओं में उपलब्ध होगी और फील्ड सर्वे से पहले 15 दिनों की अवधि तक खुली रहेगी।
जनगणना के दौरान नागरिकों से कुल 33 प्रकार की जानकारियां ली जाएंगी, जिनमें मकान की संरचना, सुविधाएं, परिवार के सदस्यों की संख्या, जाति, शिक्षा, संसाधनों की उपलब्धता और विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं के स्वामित्व जैसी जानकारी शामिल है। यह डेटा देश की नीतियों और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित होगा।
